साहित्य शोध संस्थान



सँस्थान के गठनक इतिहास :

कोनो एहन सँस्था बनइ मैथिली भाखाक क्षेत्र मे शोध के बढ़ाबइ से किरण जीक मनोरथ रहैन l अइ गप्पक जनतब किरण जीक आप्त शिष्य स्व. रामचन्द्र मिश्र 'मधुकर' जी योक ह्रदय रहैनl एकदिन किरण जीक उपस्थिति मे ओहिना साहित्यिक गप्प सरक्का आ गोष्ठी भ रहल छल जइ मे सँस्कृत लेल साहित्य अकादमी सँ सम्मानित आदरणीय रामजी ठाकुर, भूतपूर्व अध्यक्ष श्रध्येय स्व. बलभद्र झा, भूतपूर्व अध्यक्ष रामचन्द्र मिश्र 'मधुकर', गङ्गा नाथ बाबू, आशीष साहू, स्व. श्री भैरब ठाकुर, महेन्द्र नाथ जी, कुमारकान्त पाठक आ स्व. श्री भोला बाबू आदि सेहो उपस्थिति रहथि। गप्पे गप्प मे मिथिला - मैथिलीक हितार्थ शोध काजक अभाव आ खगता के देखैत सँस्थाक स्थापनाक चर्च उठल। एक स्वरेँ सब्बे गोटे प्रस्तावक अनुमोदन केलखिन आ दिनांक ५ अगस्त १९७५ क 'किरण मैथिली साहित्य शोध सँस्थान' के नियॉँ राखल गेलl .

सँस्थानक स्थापना समारोह मे स्व. श्री सुरेंद्र झा "सुमन", काशी कान्त मिश्र "मधुप", बाबू जयधारी सिंह, श्री रामदेव झा, पण्डित दुर्गाधार झा, मणिपद्म जी, अमर जी, सोमदेव जी, जीवकांत जी, चन्द्रबन्धु जी, सुधाकन्त जी आ शशिकान्त जी, रविन्द्र ठाकुर आ महेन्द्र ठाकुर आदि नामचीन मैथिली साहित्य सेवी उपस्थित भेलाह l स्थान छल लोहनारोड स्टेशन l ताहिए काल सँ सँस्था अनौपचारिक रूप सँ नहु - नहु चलि रहल छल l अइ माँझ सँस्थान माध्यमे किछु पोथीक प्रकाशन सेहो करौल गेल l .

२०११ मे सँस्थानक सदस्य लोकनि विधिवत निबन्धन/ पंजीकरण करौल जेवाक निर्णय कैल गेल l किरण जीक जेष्ठ बालक, मैथिली साहित्य प्रेमी, एस० एन० के० एम० कॉलेज मे मैथिली के विभागाध्यक्ष स्व. श्री कैलाश नाथ झाक अध्यक्षता मे पहिल कार्यकारिणीक गठन सदस्य लोकनिक द्वारा कैल गेल l पँजीयनक पछाति सँस्थाक काज के आगाँ बढ़ेबाक श्रेय एकर समर्पित सदस्य, सचढ़ नेतृत्व आ सजग सँरक्षक लोकनि के जाइत अइ। .

ध्येय : मिथिला अतिप्राचीन रामायणकालीन सभ्यता आ सँस्कृतिक नाओ थिक। भारतीय नारिक जइ स्वाभिमानी मुदा सहनशील चरित्रक अवधारणा अइ तकर आधारअइ माटिक धिया सिये सगर भारतीय साँस्कृतिक राष्ट्रक नारि समाजक ध्वजवाहिका छथि। एहन माटिक इतिहास आ एहन माटिक भाखा जे कखनो देसी भाखा कहेलक त कखनो विद्यापतिक शब्द मे देसिल बयना आ आब मैथिली कहबैत अछि तकर भाषाई इतिहासक खोज । .

दृष्टि :मिथिलाक गौरव आ मैथिली भाखाक इतिहासक नूतन दृष्टिएँ खोज करबाक लेल विविध आयामी शोध के प्रोत्साहित करब आ प्रश्रय देब। नब प्रतिभा के आगाँ आनब, समाज के सम्वेदनशील आ जागरूक करबाक सँगहि सर्व जन कल्याणक बाट पर थिर मुदा अनबरत गतिएँ बढ़ब।